कई दिनों से मैं सोच रहा था कि हिन्दी में ब्लॉग लिखूं . और आज मैंने कुछ समय निकाल कर यह कुछ पंक्तियाँ लिखी है.
चलो देखते हैं किस तरह जाता है.....
कभी कभी मै सोचता हूँ
हमारी ज़िन्दगी में उतार चराव क्यों होते है
हर सप्ताह में सात दिन
कुछ दिन मुस्कुराते हुए और कुछ तो यु ही
और बाकी बचे दिन यह समझने में निकल जाते हैं
आख़िर हुआ क्या था जिसकी वहज से दो चार आंसूं निकल आए
क्या इसी का नाम ज़िन्दगी है........?
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